नफ़रत की आंधी में मुहब्बत का दीपक,जलता रहा है जलता रहेगा

      दिल्ली के मालवीय नगर इलाक़े में गत 3 जून को हुए एक भीषण अग्निकांड की घटना घटित हुई। बताया जाता है कि इस अग्निकांड के परिणाम स्वरूप 21 लोगों की मौत आग से झुलसने या धुएँ में दम घुटने की वजह से हो गयी। कहा जा रहा है कि मृतकों में 9 भारतीय जबकि 12 विदेशी नागरिक थे। इस अग्निकांड में स्थानीय लोगों द्वारा लगभग 49 लोगों को उनकी जान बचाकर सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस अग्निकांड में रियाज़ुद्दीन नामक एक मुस्लिम गद्दा व्यापारी ने अपनी सूझबूझ,तत्परता व मानवता के चलते अग्निकांड में फंसे लगभग 15 लोगों की जान बचाकर काफ़ी सुर्ख़ियां बटोरीं। घटनास्थल के क़रीब ही रियाज़ुद्दीन की गद्दों (मैट्रेस) की दुकान है। रियाज़ुद्दीन व उनके बेटे ने आग की लपटें बढ़ते ही अपने नफ़े-नुक़सान की परवाह किये बिना अपनी दुकान के सारे गद्दे जलते हुये भवन के ठीक नीचे एक पर एक रखकर बिछा दिये। इनके अतिरिक्त अफ़ज़ल, मोहम्मद शाहरुख़ , मोहम्मद अनीस, मोहम्मद आमिर और मोहम्मद वसीम ने भी अपनी जान पर खेल कर लोगों की जान बचाने में मदद की। नतीजतन लगभग 15 प्रभावित लोगों ने जलते हुये भवन की खिड़कियों से उन्हीं गद्दों पर कूद कर अपनी जान बचाई। हालाँकि इस दौरान रियाज़ुद्दीन के क़रीब 2 लाख रूपये के गद्दे क्षति ग्रस्त हो गये। आज स्थानीय लोग यह कहने को मजबूर हैं कि रियाज़ुद्दीन ने फ़रिश्ता बनकर लोगों की जान बचाई।

      रियाज़ुद्दीन व उनके बेटे के इस समझदारी भरे साहसिक कार्य के लिये उनकी चौतरफ़ा प्रशंसा की जा रही है। लोग उनके गद्दों की क्षतपूर्ति के लिये व उनके साहसिक कार्य के लिये उनसे मिल रहे हैं उन्हें सम्मानित कर रहे हैं यहाँ तक कि उन्हें आर्थिक सहायता दे रहे हैं। उधर रियाज़ुद्दीन ने उन्हें आर्थिक सहायता देने वालों से पैसे न भेजने की अपील की है। स्थनीय भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय ने इनकी तारीफ़ करते हुये कहा कि "आज के जांबाज़ों  को सलाम। हौज़ रानी, मालवीय नगर में लगी भीषण आग के दौरान इन साहसी नागरिकों ने मदद की और यहां तक कि लोगों को सीपीआर भी दिया। मुझे आप पर बहुत गर्व है। यही इंसानियत है, जो सबसे ऊपर है और सबसे बड़ा धर्म है।" निश्चित रूप से यह घटना इंसानियत व धर्म से ऊपर साहस व मानवता की मिसाल बन गई है।  एक मुस्लिम व्यापारी ने अपने आर्थिक नुक़सान की परवाह किए बिना हिन्दू व अन्य धर्मों के लोगों की जान बचाई, और हिन्दू विधायक व अनेक संस्थाओं ने उसे सम्मान व नक़द इनाम दिया।

      इसी तरह महाकुंभ 2025 को मौनी अमावस्या पर इलाहाबाद में मची भगदड़ को याद कीजिये जब हज़ारों हिंदू तीर्थ यात्रियों को मुस्लिम बस्तियों, मस्जिदों और इमामबाड़ों में शरण मिली थी । 28–29 जनवरी 2025 को  रात 1–2 बजे के बीच प्रयागराज में संगम नोज़ और अखाड़ा मार्ग पर मौनी अमावस्या के पावन स्नान पर करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच गए थे जिससे शहर की 90 लाख आबादी में दस गुना भीड़ उमड़ पड़ी थी। इसी बीच रात 1 बजे के पास संगम तट से पहले बने द्वार पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि भगदड़ जैसी स्थिति बन गयी। तभी अखाड़ा मार्ग पर लगे बैरिकेड्स को फांदकर कुछ श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गये जिससे वहां अफ़रातफ़री मच गई। क्राउड मैनेजमेंट के लिए रास्ते रोके जाने से लोगों को और भी परेशानी का सामना करना पड़ा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस भगदड़ में 30 लोग हताहत हो गए थे। शहर के रास्तों से अनजान लोग अपनी जान बचाने के लिये कई मुस्लिम बस्तियों में प्रवेश कर गये। उसी बीच सर्दी की रात में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने करुणा और सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल पेश कर मानवता का सन्देश दिया था।  मुस्लिम लोगों ने भगदड़ के बाद शहर की अनेक मस्जिदों,दरगाहों,इमामबाड़ों व अनेक अल्पसंख्यक संस्थानों में हज़ारों हिंदू तीर्थयात्रियों को शरण दी और उन्हें परदेस में भी सुरक्षित रहने का एहसास दिलाया। उन्हें ज़रूरत के अनुसार चाय,नाश्ता,खाना,रज़ाई,कंबल,दवाइयां आदि मुहैय्या कराई। यह घटना भी सांप्रदायिक सौहार्द्र और इंसानियत की बड़ी मिसाल के रूप में सामने आई जब अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय ने हिंदू तीर्थयात्रियों की मदद कर धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर मानवता का परिचय दिया।

      साम्प्रदायिक सद्भाव पेश करने वाली दिसंबर 2015 की वह घटना भी याद कीजिये जब चेन्नई में आई भयानक बाढ़ में मस्जिदों में हिंदुओं और ईसाइयों को पनाह मिली थी। उन दिनों 1 दिसंबर 2015 से शुरू हुई बारिश एक सप्ताह तक लगातार चली थी।। इसे चेन्नई में 100 वर्षों में सर्वोच्च वर्षा के रूप में रिकॉर्ड किया गया था। बाढ़ का पानी कुछ क्षेत्रों में तो दो मंज़िलों तक पहुँच गया था। डैम के गेट खोलने के बाद शहर के कई हिस्से पूरी तरह डूब गए थे। चेन्नई में इसी बाढ़ में 260 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उस दौरान भी यहाँ की कई मस्जिदों के दरवाज़े बाढ़ पीड़ित हिन्दुओं व ईसाईयों के लिये कई हफ़्तों के लिये खुल गये थे। बाढ़ पीड़ितों को मस्जिद में पनाह के साथ साथ रसद व दवाइयां भी मुहैय्या कराई गई थीं। उसी  बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में प्रसूतावस्था में पीड़ित एक हिन्दू महिला की यूनुस नामक एक मुसलमान ने जान बचाकर उसे अस्पताल तक पहुँचाया। बाद में सुरक्षित डिलेवरी होने पर उस हिन्दू महिला और उसके पति ने अपनी नवजात बच्ची का नाम 'यूनूस' रखा। यह घटना भी धार्मिक सौहार्द और मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल है ।

       इसी तरह 2023 में पंजाब में आई भीषण बाढ़ में मुस्लिम समुदाय ने बिना किसी भेदभाव के सभी प्रभावित लोगों की मदद की थी। जमात-ए-इस्लामी हिंद और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसी संस्थाओं ने बाढ़ प्रभावितों को राशन, दवाइयां, व कपड़े वितरित किए थे । तमाम मुस्लिम स्वयंसेवकों ने सिख और हिंदू समुदायों के साथ मिलकर बचाव कार्यों में हिस्सा लिया था  । यहाँ भी उस समय बाढ़ प्रभावित इलाक़ों की कुछ मस्जिदों को अस्थायी आश्रय स्थल के रूप में खोला गया था। देशभर के मुसलमान संकट की इस घड़ी में पंजाब के बढ़ प्रभावित लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखाई दिये थे। एक तरफ़ जहां सत्ता के भूखे भेड़िये देश की सामाजिक एकता को तार तार करने पर तुले हैं वहीं देश भर में साम्प्रदायिक सद्भाव की ऐसी अनगिनत मिसालें भी देखने सुनने को मिलेंगी जब हिन्दुओं ने मुसलमानों की व मुसलमानों ने हिन्दुओं की जान बचाई व संकट की घड़ी में एक दूसरे के साथ खड़े दिखाई दिये। गोया नफ़रत की आंधी में मुहब्बत का दीपक हमेशा जलता रहा है जलता रहेगा।

 

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