कविता

मेरे दिल में इक चाहत है

प्रीति सुराना​​ मेरे दिल में इक चाहत है,आज नया सा गीत लिखूं। मुखड़े में लिख नाम तुम्हारा, बन्द-बन्द मनमीत लिखूं।।   रोज गली में ...

तुमसे ही सवाल क्यूँ

जय जवान जय किसान  दोनों आज बेहाल हैं एक सीमा पर खड़ा है दूजा खेत में ड़टा है अन्न और रक्षा से ही देश आज ...

अधूरी दास्ताँ

कुछ पुरानी यादें... और तुम्हारा साथ... वही पुराने प्रेम पत्र और अपनी बात... पलभर की गुस्ताख़ी, और अंधेरी रात... टूटें हुए मकान और सुना पड़ा खाट.. 'अवि' के ...

शहर मर भी रहा है

हर शहर की सरहद के उस पार से कुछ ठंडी हवाएँ हर बार जरूर आती है अपने साथ सभ्यताओं का एक पुलिंदा ...

प्रेम भी अपरिपक्व होने लगा हैं

स्त्री की देह तालाब-सी है, बिल्कुल ठहरी हुई सी उसमे नदी के मानिंद वेग और चंचलता कुछ नहीं फिर भी पुरुष उस ...

सुहागिन रात हो गई

जन्माष्टमी पर विशेष गीत गीत तुमसे तन-मन मिले प्राण प्रिय! सदा सुहागिन रात हो गई होंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम-जनम की ...

है राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज़

ये राम की सरज़मीं हैं... उस राम की ,जिस पर हिन्दुस्तान को हमेशा नाज़ रहेगा... ये हमारी ख़ुशक़िस्मती है कि ये ...