भलमनसाहत जाती रही
नैतिकता बची नहीं, भलमनसाहत जाती रही
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कहने को तो स्वतंत्र हुए हम 64 बसंत देख चुके हैं लेकिन जब भी जालिम अंग्रेजों का ख्याल आता है ...


