साहित्य

उठ मेरी जान! मेरे साथ ही चलना है तुझे

कैफ़ियात मशहूर शायर कै़फ़ी आज़मी के सात काव्य संग्रहों का संकलन है, जिसमें इनकार, आख़िर-ए-शब, मसनवी, आवारा सजदे, इब्लीस की ...

साहित्य और समाज

साहित्य समाज का दर्पण है, समाज का प्रतिबिम्ब है, समाज का मार्गदर्शक है तथा समाज का लेखा-जोखा है. किसी भी ...

है राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज़

ये राम की सरज़मीं हैं... उस राम की ,जिस पर हिन्दुस्तान को हमेशा नाज़ रहेगा... ये हमारी ख़ुशक़िस्मती है कि ये ...

आपको मुझसे क्यूँ मुहब्बत है

सारी दुनिया को इससे हैरत है, आपको मुझसे क्यूँ मुहब्बत है! दोस्ती का हुनर सिखाती है, कितनी दिलकश तेरी अदावत है!! झुठ को सच ...

देह प्रदर्शन का पर्याय बनते विज्ञापन

अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी आंचल में है दूध और आंखों में पानी हिन्दी कविता की ये पंक्तियां पारंपरिक भारतीय समाज ...

हिंदुत्व पर करें पुनर्विचार – डाॅ. कैलाश वाजपेयी

समीक्षा-लेख डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का यह ग्रंथ समय-समय पर उनके द्वारा समाचार पत्रों में लिखे गए विभिन्न लेखों का संग्रह हैं। ...

कहाँ गई वे बोलियाँ ?

पिछले 50 साल में लगभग सवा दो सौ भारतीय बोलियाँ समाप्त हो गई हैं। 1961 में भारत में 1100 भाषाएँ ...

भारतीय भाषाओं की जर्मन भाषा से अनोखी कुश्ती

भाषा के अखाड़े के उस्तादों ने आजकल एक अनोखी कुश्ती शुरु कर रखी है । भारतीय भाषाओं की जर्मन भाषा ...

तवांग तीर्थ यात्रा का उद्देश्य और उसका प्रभाव

भारत तिब्बत सहयोग मंच ने २०१२ में तवांग तीर्थ यात्रा शुरु की थी । यह तीर्थ यात्रा प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष ...

डेथ ड्रिल’ को मात देकर इंदिरा को मात दी थी जेपी ने

'देवसहायम, मैं एक बार फिर असफल हो गया ।' जनता सरकार के पतन के बाद 1979 के मध्य में जब ...