बजरंग मुनि
अब यह बात प्रमाणित हो गई है की पिछली राजनीतिक सरकारों ने बड़ी मात्रा में विदेशी मुसलमान को भारत में सारी सुविधाएं भी दीं और उन्हें मतदाता भी बना दिया। यह विदेशी मुसलमान उन राजनीतिक दलों के प्रचारक भी बन गए और 60 65 वर्षों तक यह राजनीतिक दल इस तरह के झूठे मतदाता बनाकर चुनाव जीतते रहे। वर्तमान चुनाव आयुक्त ने सारी पोल खोल कर रख दी है। यह बात सच है की सिर्फ चुनाव आयुक्त ही नहीं इस मामले में न्यायपालिका सरकार राष्ट्रपति सब की अपनी अपनी भूमिका है और इसीलिए इतना बड़ा काम इतनी आसानी से संभव हुआ है। सोचिए 90 लाख मतदाताओं के नाम सिर्फ बंगाल से काटे गए हैं इन 90 लाख में हो सकता है की 40 50 लाख ऐसे लोग हो जिनके नाम दोबारा हो या जो मर गए हो लेकिन 40 50 लाख तो ऐसे जरूर हैं जो वर्तमान में भी जीवित है और जो विदेशी हैं और अधिकांश मुसलमान है । यही कारण है कि विपक्ष के सभी नेता और उनके प्रचारक आज छाती पीट रहे हैं।
मैं एक कम्युनिस्ट विचारक मित्र का आज लेख पढ़ रहा था उन्होंने भी इसी तरह दुख व्यक्त किया है की किस तरह भारत में न्यायपालिका चुनाव आयोग तथा अन्य सभी स्थानों पर संघ के लोग भरे जा रहे हैं। मुझे इस बात से प्रसन्नता हुई कि अब इस प्रकार के देश विरोधी लोग बहुत चिंतित हो गए हैं। मैं चाहता हूं कि पूरे देश की मतदाता सूचियां का गहराई से जांच कर कर सभी विदेशियों को भारत से निकाल देना चाहिए क्योंकि जो अवैध रूप से यहां आकर विपक्ष की सरकार बनवाना चाहते हैं उनके सपने चूर-चूर होने ही चाहिए। इन अपने लाडले मतदाताओं का हाल देखकर ममता बनर्जी तो बिल्कुल पागल हो गई है आज ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ बहुत दुर्व्यवहार किया। ऐसा बुरा हाल सिर्फ ममता का नहीं है लगभग सभी विपक्षी नेता पागलों के शरीखा व्यवहार कर रहे हैं और भारत के सभी देशभक्त यह हाल देखकर खुश हो रहे हैं।


