न्युज डेस्क, भारत वार्ता।
नई दिल्ली, उत्तम नगर। राजधानी दिल्ली में द्वारका के उत्तम नगर इलाके में होली पर हिंदू युवक की हत्या होने पर सोशल मीडिया में भारी आक्रोश की लहर है। यह जो उपर आप तस्वीर देख रहे हैं यह दिल्ली के उत्तम नगर के तरुण सोनकर नाम के व्यक्ति की है, जो कि हिन्दू समाज से आता है जिसकी हत्या इसलिए कर दी जाती है कि उनकी 11 साल की बेटी ने होली के दिन अपने ताऊ के ऊपर कलर फेंका था और वह कलर ताऊ पर न गिरकर जमीन पर गिर गया जिसकी कुछ बूंदे एक मुस्लिम महिला के उपर पड़ गई। सनद रहे कि वो महिला कोई ऐसी-वैसी न होकर ईमान की एकदम पक्की वाली जेहादन थी।
हस्तसाल उत्तम नगर में महिलाएं सुदर्शन टीवी के पत्रकार
को शीशा का टुकड़ा दिखाया जो पीड़ित की हत्या में
प्रयोग हुआ था।
हस्तसाल उत्तम नगर में महिलाएं सुदर्शन टीवी केपत्रकार
को शीशा का टुकड़ा दिखाया जो पीड़ित की हत्या में
प्रयोग हुआ था।
फिर क्या था बैलून के छीटें पड़ने के कारण महिला ने लड़ाई शुरू कर दिया मगर घर वाले क्षमा मांग लिए मगर रंग पड़ने को लेकर बवाल मचाने वाली महिला को गैर मुस्लिमों से बेहंतहा नफरत थी उसके मन में कुछ और चल रहा था और इधर बच्ची के परिवार के लोग क्षमा प्रार्थना किये कि तुम मेरी बेटी जैसी हो मगर उसको किसी न किसी बहाने बवाल काटना था। सनद हो कि वो महिला इसके ठीक घनी बस्ती में जिसके गली के दरवाजे हमेशा दोनों ओर से बंद रहते हैं। वहां से कम से कम 50 लोगों को बुलाकर लाती हैं और बच्ची के परिवार वालों के उपर हमला करवा देती है उसी दौरान बच्ची का पिता तरूण अपने मित्रों के साथ होली खेलकर कहीं से आ रहा था उसकी बाइक रास्ते में ही रोककर विशेष शांतिप्रिय समुदाय के लोगों ने थप्पड़, घूंसे, लातों से, शीशे के नुकीले टुकड़ों से, लंबे-लंबे राडों से बहुत मारा जिससे वो बेहोश होकर गिर जाता है गिरने के बाद भी जेहादियों की भीड़ नहीं रूकती उसके सीने पर चढ़कर पत्थरों से मार-मार कर पूरी तरह लहूलुहान कर देते हैं। इसके साथ तरूण के पिता को भी उसके मुंह में माथे पर प्राण घातक वार करते हैं जिससे उनके ऑंख में गहरी चोट लग जाती है।
हत्या करने के बाद जेहादी अपने घरों में ताला लगाकर रफू चक्कर हो गए हैं जिनमें बाबू खान रंगरेज ए-549 हस्तसाल, उत्तम नगर और उसके एक साथी करीब-करीब सात घरों में ताले लगे हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने कुछ स्मैकियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है पर वहां के निवासियों के मुताबिक पुलिस असली हत्यारों को अभी तक नहीं पकड़ पाई है, हत्या करवाने वाली जेहादन महिला भी पूरी तरह से फरार है।
सोशल मीडिया में अच्छे मुसलमानों से लोग गुहार लगा रहे हैं ऐसे में देश के अच्छे मुसलमानों को आगे आना चाहिए और तरूण को जिन-जिन जेहादियों ने हत्या की है उनको दण्ड दिलवाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि सभी मानव एक समान हैं।
सोशल मीडिया facebook पर Charan Jeet Charan (चरन जीत चरन) लिख रहे हैं कि :
उत्तम नगर के तरुण के ऊपर हुआ जानलेवा हमला अचानक किसी अचानक दुर्घटना का परिणाम नहीं है बल्कि इस्लामिक ईको सिस्टम की कार्यशैली का सुसंगठित तरीके से किया गया जेहादी कार्य है । आप अपने तरीके से शोर मचाइए । उधर मस्जिदों में एक काफिर की मौत पर जश्न मनाया जा चुका होगा । विमर्श भी हो चुका होगा । मारने वालों को शाबाशी और उनके लिए इनाम से लेकर कानूनी मदद की व्यवस्था का इंतजाम भी हो चुका होगा । जेहादी इको सिस्टम चौदह सौ वर्षों से ऐसे ही काम कर रहा है । एक राजनीतिक पार्टी और एक संगठित गिरोह को मिलाकर जो कॉकटेल बनता है उसी का नाम इस्लाम है । इस संगठित गिरोह से निपटने की कला दुनिया में केवल इसराइल ने ईज़ाद की है और भारत में योगी ने । उसके परिणाम हमारे सामने है सीधे एनकाउंटर सीधे हूरों के पास !!
जय श्री राम हर हर महादेव !!
और वहीं Pawan Vijay (पवन विजय) जी का कहना है कि :
विशेष समुदाय के इलाके में हिंदू सुरक्षित नहीं है। दिल्ली के इलाके संवेदनशील हैं, संवेदनशील का मतलब विशेष समुदाय वाले इलाके जहां पुलिस जाने से डरती है। संवेदनशील इलाका भारत में पाकिस्तान है जहां जाने के लिए वीजा परमिट चाहिए। भारत में लाखों संवेदनशील इलाके हैं, लाखों पाकिस्तान हैं।
दिल्ली के उत्तमनगर में भी एक संवेदनशील इलाका है जहां तरुण कुमार की लिंचिंग हो गई, हिंदू की हत्या हो तो आपसी मामला, विशेष समुदाय की हो तो सांप्रदायिक मामला हो जाता है। मान लो आपसी मामला भी हो तो क्या हिंदू को इसलिए मार दिया जाय कि वह अपने त्योहार मना रहा था?
तरुण की हत्या का भय विशेष समुदाय को इसलिए नहीं है क्योंकि उन्हें पता है कि इसके बाद कानूनी कार्यवाही में वे बच जायेंगे, कानून और उसका क्रियान्वयन केवल कमजोर हिन्दुओं के मामले में सख्त होता है।
Kapil Mishra जी, अनुरोध है इस पर संज्ञान लीजिए, न्याय के मामले में उत्तर प्रदेश का अनुसरण किया जा सकता है।
अपने फेसबुक वाल पर श्रवण दूबे ( Sharwan Dubey ) का कहना है कि :
क्या दिल्ली में कानून का डर खत्म हो चुका है?
उत्तम नगर में एक छोटी सी बच्ची द्वारा अनजाने में फेंके गए गुब्बारे के रंग के बदले, जिस तरह भीड़ ने एक युवक की निर्मम हत्या कर दी, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना है। यह केवल एक हत्या नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी हत्या है।
ऐसी घटनाओं से स्पष्ट है कि अपराधियों के मन में कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है।
हमारी मांग:
दोषियों की पहचान कर उन्हें अविलंब फांसी के फंदे तक पहुँचाया जाए।
दिल्ली सरकार और पुलिस प्रशासन से आग्रह है कि यहाँ भी 'योगी मॉडल' की तरह अपराधियों के खिलाफ तत्काल और कठोरतम कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी कानून को हाथ में लेने की जुर्रत न करे।
दिल्ली की सड़कों पर आम नागरिक कब तक असुरक्षित महसूस करेगा? हमें न्याय चाहिए, और वह भी शीघ्र!


