महाभ्रष्ट लेखपाल (Corrupt Lekhpal) मुख्यमंत्री से शिकायत पर तिलमिलाया

जौनपुर, उप्र।  जिला जौनपुर, तहसील मड़ियाहूं के अंतर्गत काम करने वाला महाभ्रष्ट रिश्वतखोर लेखपाल मुख्यमंत्री से शिकायत पर तिलमिला सा गया है। ज्ञात हो कि तहसील मड़ियाहूं के अंतर्गत ग्राम परियत में एक कोतवाली का कुंआ है जिस पर वहां के एक भूमाफिया सुरेश चंद गुप्ता, उसकी पत्नी विजय लक्ष्मी व उसके बेटे अनुराग गुप्ता ने उस ऐतिहासिक कुंआ का काफी भाग अतिक्रमण कर लिया है जिसके कारण ग्रॉमीणों में बहुत आक्रोश व असंतोष है लेकिन उपरोक्त भूमाफियाओं के  डर से किसी ने मुंह खोलने की हिम्मत नही की किंतु जैसे ही हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा नंद किशोर मिश्रा को पता चला उन्होंने उस ऐतिहासिक कुंआ को अतिक्रमण मुक्त करवाने का बेड़ा उठा लिया । गतसप्ताह उन्होंने दुष्ट लेखपाल के विरूद्ध बहुत ही कड़ा पत्र उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखा। फिर क्या था उपरोक्त पत्र से भ्रष्टाचार से चोली दामन के साथ वाले परियत का लेखपाल राम शिरोमणि बुरी तरह से तिलमिला गया है। उसने आक्रोश में आकर आज बाबा नंद किशोर मिश्रा को फोन भी किया और बोला कि आप मेरे विरूद्ध हर महीना क्यों पत्र लिख रहे हो तो बाबा नंद किशोर मिश्र ने कहा कि तुम उस ऐतिहासिक कुंआ पर गलत रिपोर्ट क्यों दे रहे हो, उत्तर तुम्हें हां या न में देना था तुम उसका उत्तर देने में महीनों क्यों लगा देते हो, यदि कुंआ अतिक्रमण मुक्त है तो उसकी फोटो मीडिया में सार्वजनिक कर दो वर्ना मैं ग्रॉम परियत आकर पूरे देश को कुंआ अतिक्रमण लाइव दिखाउंगा।

लेखपाल मुख्यमंत्री और उनके सचिव को पूरी तरह से गुमराह कर रहा है

ज्ञात हो कि वह भ्रष्ट लेखपाल व मड़ियाहूं प्रशासन के बड़े अधिकारी उपरोक्त भ्रष्ट लेखपाल को बचा रहे हैं वो जांच में जानबूझकर देरी व हीला-हवाली करते हैं। हिंदू महासभा के अध्यक्ष पं बाबा नंद किशोर मिश्र ने अपने पत्र में लिखा है कि  माननीय मुख्यमंत्री महोदय जौनपुर जिला, तहसील मड़ियाहूं  के अंतर्गत परियत ग्राम का जो कोतवाली का कुंआ है उसकी जांच जौनपुर जिला के डीएम के हाथ में देने का आदेश पारित करें व माननीय डीएम जी स्वयं मड़ियाहूं तहसील के एसडीएम को आदेश दें कि वे स्वयं ग्रॉम परियत जाकर अतिक्रमण स्थल की जांच करें कि अतिक्रमण कुंआ का है कि नहीं  मौके पर जाकर सही वस्तुस्थिति का पता लगाएं, पुन: एसडीएम जी अपनी आख्या मुख्यमंत्री को लगावें क्योंकि तहसीलदार व अन्य छोटे अधिकारी आदि स्वयं लेखपाल को बचा रहे हैं और जानबूझकर देरी पर देरी करते जा रहे हैं क्योंकि यह जनहित का मामला है।

आगे बाबा नंद किशोर जी ने लिख है कि जिला जौनपुर के अंतर्गत मड़ियाहूं तहसील के प्रमुख अधिकारी, माननीय मुख्यमंत्री जी, मुख्यमंत्री सचिव आदि को शत-प्रतिशत गुमराह कर रहे हैं। महाभ्रष्ट लेखपाल राम शिरोमणि बहुत बड़ा दुष्ट और जनता के साथ धोखा करने वाला प्रतीत हो रहा है जिसकी ओर से मड़ियाहूं के एसडीएम क्यों आंख मूंदे हुए हैं, मेरी समझ से परे है,  आखिर ऐसा वे क्यों कर रहे है? एक झूठी रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल को एसडीएम क्यों बचा रहे हैं? और तहसीलदार ने तो अपनी रिपोर्ट लगाई ही नहीं फिर एक महीने के निकट क्या जांच किया ?

 अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ हिंदूवादी नेता ने मड़ियाहूं के तहसीलदार पर निशाना साधते हुए लिखाहै कि कुंआ खुला है जिस पर हां या ना में उत्तर देना था जिसकी जांच स्वयं तहसीलदार महोदय  कर रहे थे, ने जांच के नाम पर कोई  रिपोर्ट ही नहीं लगाई। रिपोर्ट वही लेखपाल की पुन: पुरानी लगा दी, आखिर तहसीलदार जांच कर रहा है तो उसकी रिपोर्ट कहां है? पुरानी रिपोर्ट  लगाकर आप किसे मूर्ख बना रहे हैं और उत्तर हां या ना में देना था उस उत्तर देने में पूरा महीना क्यों लगा दिया ? क्या एसडीएम कार्यालय के अधिकारी  इतने बड़े प्रदेश के मुख्यमंत्री को गुमराह नहीं कर रहे हैं ?  जब जांच एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार कर रहा था तब तहसीलदार ने क्यों कुछ नहीं लिखा अपनी रिपोर्ट में ? क्या तहसीलदार ग्रॉम-पोस्ट परियत जाकर कुंआ के अतिक्रमण की जांच किया ? जांच तहसीलदार कर रहा है और रिपोर्ट में तहसीलदार की कोई रिपोर्ट ही नहीं लगी है, आखिर ऐसा क्यों  ? इस तरह तहसीलदार  भ्रष्ट लेखपाल राम शिरोमणि को बचा नहीं रहे हैं ? जब मड़ियाहूं के तहसीलदार ने रिपोर्ट में कुछ लिखा ही  नहीं तो वो कैसे इस कुंआ अतिक्रमण के जांचकर्ता कैसे बन गये ?   

  आगे हिंदू महासभा के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को दिए पत्र में  लिखा है कि रिपोर्ट दिनांक 26/11/2020 में (शिकायत संख्या : 40019420065266)  लगाई थी, वही रिपोर्ट दिनांक  05/01/2021 में (शिकायत संख्या  40019421000956) में लगा दिया गया।   कहने का मंतव्य  यह कि कुल मिलाकर आप हमें, माननीय मुख्यमंत्री को, उनके सचिव को पूर्णरूपेण धोखा दे रहे हैं, मुख्यमंत्री कार्यालय व माननीय मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे हैं। माननीय एसडीएम जी के नेतृत्व में, जो उनकी तहसीलदार टीम रामशिरोमणि जैसे लेखपाल की जांच कर रही है वह ऐसे भ्रष्टाचारी को क्यों बचा रहे हैं, और कब तक बचाएंगे?

 उपरोक्त नेता ने राजस्व निरीक्षक पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राजस्व निरीक्षक, निगोह मड़ियाहूं  के अधिकारी ओम प्रकाश  ने आख्या में लिखा है कि लेखपाल के अनुसार कुंआ खाली है और प्रार्थना पत्र निक्षेपति हेतु आख्या प्रेषित है। श्रीमान जी, वह अधिकारी निगोह क्षेत्र में काम करता है तो क्या वह दो किलो मीटर दूर ग्रॉम परियत परियत जाकर सही से कुंआ का जांच नहीं कर सकता था यानी उसने अपनी रिपोर्ट मे दो लाइन लिखकर सब कुछ लेखपाल के सिर पर डाल दिया। राजस्व निरीक्षक, निगोह मड़ियाहूं के अधिकारी ओम प्रकाश, तहसीलदार, मड़ियाहूं,  तहसील के प्रमुख अधिकारी लेखपाल को बचा नहीं रहे हैं ? हमें तहसील के प्रमुख अधिकारी की भूमिका बहुत संदिग्ध लग रही है?

 नंद किशोर मिश्र ने एसडीएम के कार्य प्रणाली पर बहुत हैरानी जताते हुए लिखा कि तहसीलदार की जांच पर जब एसडीएम मौन है तो  इस लेखपाल के परियत में स्थित कोतवाली के कुंआ अतिक्रमण वाले जांच  के भ्रष्टाचार में उनकी भूमिका पर प्रश्न उठना स्वाभाविक  है।

 उस उपरोक्त पत्र में उन्होंने आगे लिखा कि पिछले जांच जो दिनांक  05/01/2021 में (शिकायत संख्या  40019421000956)  में नया क्या है? नया कुछ भी नहीं क्योंकि वही पुरानी लेखपाल की रिपोर्ट लगाकर  माननीय मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री सचिव को पूरी तरह गुमराह किया जा रहा है। पूरा का पूरा एसडीएम ऑफिस नकारा है और उस भ्रष्ट लेखपाल राम शिरोमणि को बचा रहा है।

आगे उन्होंने पत्र में लिखा कि माननीय मुख्यमंत्री जी, आप  जिला जौनपुर के डीएम को आदेश पारित करें कि वे एसडीएम को आदेश दें कि तीस दिन के अंदर ग्रॉम परियत के कुंआ अतिक्रमण की वे वहां स्वयं जाकर निरीक्षण करें और उसके फोटो खींचकर स्वयं मुख्यमंत्री को भेजें अन्यथा वहां की तस्वीर को मैं स्वयं सब जगह वायरल करूंगा। इसके साथ मैं एसडीए के साथ-साथ समस्त  भ्रष्ट अधिकारियों के विरूद्ध लखनऊ, दिल्ली में प्रेस कान्फ्रेंस कर इस भ्रष्टाचार को बताउंगा व मड़ियाहूं के समस्त भ्रष्ट अधिकारियों के विरूद्ध राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलावाउंगा। मैं कोई धमकी नहीं दे रहा हूं मात्र बता रहा हूं।

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